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कैसे एक मिडिल क्लास भारतीय लड़के ने Google को हिलाकर रख दिया? Perplexity AI की पूरी कहानी

पिछले 25 सालों से इंटरनेट की दुनिया पर Google का एकछत्र राज रहा है। लगभग 90% मार्केट शेयर और हर दिन 16 अरब से ज़्यादा सर्च के साथ, Google को चुनौती देना लगभग नामुमकिन सा लगता था। Microsoft Bing, Yahoo, और DuckDuckGo जैसे कई बड़े खिलाड़ी आए और गए, लेकिन कोई भी Google के सिंहासन को हिला नहीं सका। पर तभी, एक मिडिल क्लास भारतीय लड़के, अरविंद श्रीनिवास, ने एक ऐसे स्टार्टअप की शुरुआत की जिसे आज Google के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है।

इस स्टार्टअप का नाम है Perplexity AI। यह सिर्फ़ एक AI चैटबॉट नहीं, बल्कि एक “रियल-टाइम AI सर्च इंजन” है। जहाँ Google आपके सवालों के जवाब में लिंक्स की एक लंबी लिस्ट थमा देता है, वहीं Perplexity आपको सीधा, सटीक और संक्षिप्त जवाब देता है, वो भी उन सभी स्रोतों (sources) के साथ जहाँ से जानकारी ली गई है। यह मॉडल इतना दमदार है कि लॉन्च के समय जहाँ इस पर सिर्फ़ 3,000 सवाल रोज़ पूछे जाते थे, वहीं आज यह आंकड़ा 30 मिलियन रोज़ाना को पार कर चुका है।

यह कहानी Live Hindi Facts की रिपोर्ट के अनुसार है, जो बताती है कि कैसे एक आइडिया ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

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1. गूगल और चैटजीपीटी की दुनिया: असली समस्या क्या थी?

नवंबर 2022 से पहले तक, “इंटरनेट” का मतलब ही “गूगल” था। कुछ भी जानना हो, ढूंढना हो, या सीखना हो, दिमाग में पहला नाम गूगल का ही आता था। लेकिन नवंबर 2022 में ChatGPT के लॉन्च होते ही इंटरनेट की हवा ही बदल गई।

ChatGPT ने पहली बार दुनिया को दिखाया कि एक कंप्यूटर न सिर्फ़ आपके सवालों का जवाब दे सकता है, बल्कि आपकी भाषा, टोन और मूड को भी समझ सकता है। यह इतना क्रांतिकारी था कि सिर्फ़ दो महीनों में इसके 100 मिलियन यूज़र्स हो गए—इतनी तेज़ ग्रोथ उस वक्त तक किसी प्लेटफॉर्म ने नहीं देखी थी, ना Instagram ने और ना ही TikTok ने। लेकिन इस क्रांति के बीच दो बड़ी समस्याएं थीं, जिन्होंने बाज़ार में एक बड़ा गैप बना दिया था:

  • गूगल की समस्या: गूगल आपको जानकारी सीधे नहीं देता। वह आपको नीले लिंक्स की एक लिस्ट देता है, और सही जानकारी ढूंढने की सारी मेहनत यूज़र को खुद करनी पड़ती है।
  • चैटजीपीटी की समस्या (उस समय): चैटजीपीटी रियल-टाइम इंटरनेट से नहीं जुड़ा था। उसकी जानकारी 2021 के बाद की घटनाओं तक सीमित थी। इसके अलावा, वह कोई सोर्स नहीं बताता था, जिससे जानकारी को वेरिफाई करना बहुत मुश्किल था।

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2. अरविंद श्रीनिवास: चेन्नई से कैलिफोर्निया तक का सफ़र

चेन्नई के एक मिडिल क्लास परिवार में पले-बढ़े अरविंद श्रीनिवास ने IIT-JEE की तैयारी की। उनकी पहली पसंद कंप्यूटर साइंस थी, लेकिन उन्हें IIT मद्रास में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग मिली। शुरुआत में उन्हें यह थोड़ा बुरा लगा, लेकिन यही उनके लिए एक वरदान साबित हुआ। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ने उन्हें सिखाया कि मशीनें कैसे सोचती हैं और सिस्टम कैसे काम करते हैं।

IIT में एक मशीन लर्निंग प्रतियोगिता जीतने के बाद उनका करियर पूरी तरह से AI की दिशा में मुड़ गया। आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका की UC Berkeley यूनिवर्सिटी गए, जहाँ उन्होंने AI और मशीन लर्निंग में PhD शुरू की।

इस दौरान उन्होंने OpenAI, Google Brain और DeepMind जैसी दुनिया की टॉप AI लैब्स में काम किया। OpenAI में इंटर्नशिप के दौरान उन्हें एक “रियलिटी चेक” मिला, जहाँ उन्होंने देखा कि लोग किस ऊँचे स्तर पर सोच रहे हैं। एक रात बर्कले की लाइब्रेरी में उन्हें गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज की किताब ‘How Google Works’ मिली। उस किताब में लिखी एक बात ने उनकी सोच बदल दी: एक परफेक्ट सर्च इंजन वो होगा जो सिर्फ़ शब्दों को नहीं, बल्कि यूज़र के कॉन्टेक्स्ट (संदर्भ) को समझे। अरविंद को यह समझ आ गया कि “परफेक्ट सर्च का मतलब ही परफेक्ट AI है।”

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3. Perplexity AI का जन्म: एक शानदार ‘जुगाड़’

अरविंद का विज़न एकदम साफ़ था: एक ऐसा टूल बनाना जो इंटरनेट से रियल-टाइम डेटा उठाए, AI की मदद से उसे Summarize करे और हर जानकारी के लिए सोर्स भी दे।

लेकिन उनके सामने एक अरबों डॉलर की समस्या थी – पैसा। एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) को ट्रेन करना दुनिया के सबसे महंगे कामों में से एक है, जिसमें गूगल, मेटा और OpenAI जैसी कंपनियाँ खरबों डॉलर खर्च कर चुकी हैं। Apple जैसी कंपनी भी सालों की मेहनत के बाद एक स्थिर मॉडल नहीं बना पाई है।

यहाँ अरविंद ने एक शानदार दिमाग लगाया। उन्होंने अपना खुद का LLM बनाने की बजाय एग्रीगेटर मॉडल पर काम करने का फैसला किया। आसान भाषा में, उन्होंने OpenAI के GPT, मेटा के Llama और गूगल के Gemini जैसे पहले से बने हुए बेस्ट मॉडल्स को API के ज़रिए इस्तेमाल करने का रास्ता चुना। यह इसलिए संभव था क्योंकि OpenAI जैसी कंपनियाँ हर रिक्वेस्ट के लिए एक मामूली कीमत (nominal cost) पर अपने मॉडल का एक्सेस देती हैं, वहीं मेटा ने अपने Llama मॉडल को ओपन-सोर्स कर दिया है। इस ‘जुगाड़’ के तीन बड़े फ़ायदे हुए:

  1. लागत में बचत: उन्हें मॉडल बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
  2. लचीलापन: उनका सिस्टम किसी एक मॉडल पर निर्भर नहीं था। वह हमेशा बाज़ार में मौजूद सबसे अच्छी टेक्नोलॉजी को अपने सिस्टम में जोड़ सकते थे।
  3. निष्पक्षता (Unbiased): चूँकि Perplexity लाइव इंटरनेट से जानकारी लेकर सोर्स देता है, इसलिए इसके जवाबों में चीन के DeepSeek या कभी-कभी चैटजीपीटी जैसे कल्चरल या राजनीतिक झुकाव का खतरा कम होता है। इसके अलावा, सोर्सेस के लिए भी सिस्टम को इस तरह से ट्रेन किया गया था कि वह भरोसेमंद वेबसाइट्स और आर्टिकल्स को टॉप प्राथमिकता पर रखे।

—————————————————————————-Read Also This Post :- ये 6 AI टूल्स हमेशा के लिए आपका काम करने का तरीका बदल देंगे

4. चुपचाप लॉन्च और ज़बरदस्त ग्रोथ

7 दिसंबर 2022 को, अरविंद ने बिना किसी बड़े इवेंट या शोर-शराबे के, हैकर न्यूज़ पर एक छोटा सा पोस्ट डालकर Perplexity AI को लॉन्च कर दिया।

शुरुआती यूज़र्स, जो ज़्यादातर टेक एक्सपर्ट और रिसर्चर थे, उन्हें यह टूल बहुत पसंद आया। इसकी सटीकता और सोर्स देने की क्षमता के कारण लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। इस तरह, बिना किसी मार्केटिंग बजट के Perplexity की ग्रोथ तेज़ी से होने लगी। अरविंद के मुताबिक, सिर्फ एक साल में Perplexity का इस्तेमाल 1000 गुना बढ़ गया था।

आंकड़े इसकी ज़बरदस्त ग्रोथ की कहानी खुद कहते हैं:

Metric (मापदंड)At Launch (शुरुआत में)By Dec 2023 (दिसंबर 2023 तक)Current Status (वर्तमान स्थिति)
Daily Queries (रोज़ की खोज)3,0004 Million30 Million
Monthly Visits (मासिक विज़िट)2.2 Million (Dec 2022)45 Million

इसकी क्षमता को देखते हुए Nvidia और Jeff Bezos जैसे टेक दिग्गजों ने इसमें निवेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में इस कंपनी की वैल्यूएशन सीधा 20 बिलियन को क्रॉस कर गया।

Read Also This Post :- [यहाँ अपने दूसरे पोस्ट का लिंक डालें]

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5. Perplexity बाकियों से कितना अलग है?

बहुत से लोग Perplexity AI, ChatGPT और ध्रुव राठी के Fiesta AI के बीच कंफ्यूज रहते हैं। आइए, एक टेबल के ज़रिए इनके अंतर को समझते हैं:

Feature (विशेषता)Perplexity AIChatGPT / DeepSeekDhruv Rathee’s Fiesta AI
मुख्य कामआपका इंटरनेट रिसर्चरएक क्रिएटिव राइटिंग और बातचीत का टूलअलग-अलग AI के जवाबों की तुलना करना
जानकारी का स्रोतरियल-टाइम इंटरनेट से जानकारी लाता हैअपने ट्रेंड डेटा पर आधारित (रियल-टाइम नहीं)दूसरे AI मॉडल्स (जैसे ChatGPT, Perplexity)
जवाब कैसे देता हैजानकारी को Summarize करके सोर्स के साथ जवाब देता हैखुद से कहानी, स्क्रिप्ट, कोड जेनरेट करता हैएक ही सवाल के लिए सभी AI के जवाब एक साथ दिखाता है
मकसदसटीक और वेरिफाइड जानकारी देनारचनात्मक काम और सामान्य बातचीत करनायह देखने में मदद करना कि कौन सा AI बेहतर जवाब दे रहा है

—————————————————————————-👉 Official Website: https://www.perplexity.ai

6. तो फिर Google इसे कॉपी क्यों नहीं कर लेता?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है। अगर Perplexity का मॉडल इतना ही अच्छा है, तो गूगल इसे कॉपी क्यों नहीं कर लेता? इसके दो बड़े कारण हैं:

  1. बिज़नेस मॉडल का खतरा: गूगल की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया विज्ञापन (Ads) है। लोग लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो गूगल को पैसा मिलता है। अगर गूगल Perplexity की तरह सीधे जवाब देने लगे, तो कोई लिंक्स पर क्लिक नहीं करेगा और उसका अरबों डॉलर का विज्ञापन का बिज़नेस ठप हो जाएगा।
  2. इज़्ज़त का सवाल (Reputation Risk): अगर गूगल सीधे जवाब देता है, तो हर गलत, पक्षपाती या विवादित जवाब की पूरी ज़िम्मेदारी उसकी होगी। इसके अलावा, वह अपने ही API कस्टमर्स (जो स्टार्टअप्स गूगल के AI मॉडल इस्तेमाल करते हैं) से सीधा मुकाबला करने लगेगा, जो एक खराब बिज़नेस प्रैक्टिस है।

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7. भविष्य का सर्च इंजन कैसा होगा?

अरविंद श्रीनिवास का मानना है कि AI आंसर इंजन ही भविष्य का “डिफ़ॉल्ट इंटरफ़ेस” बनेंगे। जब भी लोगों को कुछ सोचना, तुलना करना या विश्लेषण करना होगा, तो वे गूगल जैसे लिंक-आधारित सिस्टम पर जाने की बजाय सीधे Perplexity जैसे टूल्स पर आएंगे। Perplexity अब कई सेक्टर्स में विस्तार कर रहा है, जिसमें शिक्षा एक प्रमुख क्षेत्र है, जहाँ यह छात्रों के लिए एक रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर काम कर सकता है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

Perplexity AI की कहानी असाधारण है – एक लाइब्रेरी में जन्मे आइडिया से लेकर गूगल को चुनौती देने वाली एक बड़ी कंपनी बनने तक का सफ़र।

यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपकी सोच साफ़ है, रणनीति स्मार्ट है और आप लगातार मेहनत करते हैं, तो भारत का एक मिडिल क्लास लड़का भी दुनिया के सबसे बड़े दिग्गजों को टक्कर दे सकता है। यह कहानी भारत के उन करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं।

आपको क्या लगता है, क्या Perplexity सच में Google को पीछे छोड़ पाएगा? कमेंट्स में बताएं!

❓ FAQ – Perplexity AI से जुड़े सवाल

Q1. Perplexity AI क्या है?
Perplexity AI एक रियल-टाइम AI सर्च इंजन है जो सीधे जवाब देता है और साथ में उनके स्रोत (sources) भी दिखाता है।

Q2. Perplexity AI और Google में मुख्य अंतर क्या है?
Google लिंक दिखाता है, जबकि Perplexity AI जानकारी को summarize करके सीधा जवाब देता है।

Q3. क्या Perplexity AI ChatGPT से बेहतर है?
रिसर्च और वेरिफाइड जानकारी के लिए Perplexity बेहतर है, जबकि ChatGPT क्रिएटिव और बातचीत के लिए ज्यादा उपयोगी है।

Q4. क्या Perplexity AI भरोसेमंद है?
हाँ, क्योंकि यह हर जवाब के साथ विश्वसनीय वेबसाइट्स के स्रोत देता है।

Q5. Perplexity AI का भविष्य क्या है?
AI-आधारित Answer Engines भविष्य में Google जैसे पारंपरिक सर्च को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।

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