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India AI Impact Summit 2026: जब AI ने बदली भारत की तस्वीर – अब आपकी कार, रेलवे और सब कुछ होगा स्मार्ट!

नमस्ते दोस्तों! कैसे हैं आप सब? क्या आपने कभी कल्पना की थी कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपकी कार आपसे खुद कहेगी, “नमस्ते, चलिए अब एयरपोर्ट चलते हैं,” या जब आप ट्रेन का वेटिंग टिकट बुक करेंगे, तो आपका मोबाइल आपको खुद बताएगा कि इसके कन्फर्म होने के कितने परसेंट चांस हैं? सुनने में ये सब किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा लगता है ना? लेकिन मेरे भाई, अब ये हकीकत है!

हाल ही में दिल्ली के आलीशान ‘भारत मंडपम’ में AI Impact Summit 2026 का आयोजन हुआ, और सच कहूं तो वहां का माहौल देखकर मेरा तो दिमाग चकरा गया। वहां केवल रोबोट्स नहीं थे, बल्कि वहां ‘नया भारत’ अंगड़ाई ले रहा था। आज आपका ये डिजिटल दोस्त आपको उसी समिट की सैर पर ले जाएगा, जहां चाय की चुस्कियों के साथ हम जानेंगे कि कैसे एआई (Artificial Intelligence) अब हमारे खेतों, दफ्तरों, सरहदों और यहां तक कि हमारी रसोई तक पहुंच गया है। तो चलिए, शुरू करते हैं तकनीक का ये शानदार सफर!

1. टाटा की ‘ऑटोनोमो’ कार: अब ड्राइवर की छुट्टी, कार संभालेगी मुट्ठी!

समिट में सबसे ज्यादा भीड़ जिस स्टाल पर थी, वो था टाटा (Tata) का। वहां खड़ी थी ‘Tata Autonomo’। चलिए, मैं आपको इस गाड़ी के अंदर ले चलता हूं। जैसे ही आप ड्राइवर की सीट पर बैठते हैं, सबसे पहले आपको बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन करना पड़ता है। यानी जब तक आपकी उंगली के निशान या चेहरा मैच नहीं होगा, गाड़ी का इंजन हिलेगा भी नहीं। इसका मतलब चोरी की तो अब बिल्कुल ‘नो टेंशन’!

मैंने वहां एक डेमो देखा, जिसमें कार एयरपोर्ट से भारत मंडपम की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही टोल नाका आया, कार खुद-ब-खुद रुक गई और उसने स्क्रीन पर मैसेज दिखाया कि “मैं टोल पे कर रही हूं।” टोल कटते ही सफर फिर शुरू! चलाने का तरीका भी एकदम देसी है—बस बोलिए “हाय ऑटोनोमो, मुझे स्ट्रेट जाना है,” और गाड़ी चल पड़ी।

सबसे कमाल का फीचर मुझे लगा कोहरे (Fog) वाला। दिल्ली के उस जहरीले और घने कोहरे में जहां इंसान को दो फिट आगे का नहीं दिखता, ये कार अपने सेंसर्स की मदद से आपको बताएगी कि आगे कितनी दूरी पर जंक्शन है और आपको कितनी स्पीड रखनी चाहिए। इतना ही नहीं, अगर आपके बगल से कोई एंबुलेंस निकल रही है, तो कार उसकी सायरन की आवाज पहचान कर खुद किनारे हो जाएगी ताकि मरीज को रास्ता मिल सके। और हां, अगर गाड़ी चलाते वक्त आपको नींद की झपकी आई, तो कार की स्क्रीन आपको वार्न (Warn) करेगी। अगर आप फिर भी नहीं जागे, तो कार खुद ही सुरक्षित तरीके से साइड में पार्क हो जाएगी। गजब है न?

2. भारतीय रेलवे का कायाकल्प: ‘रेल वन’ ऐप और कन्फर्म टिकट का गणित

रेलवे की बात आते ही हम सबके माथे पर पसीना आ जाता है—वेटिंग टिकट! लेकिन अब घबराइए मत। हमारे रेल मंत्री जी ने 1 जुलाई 2026 को एक क्रांतिकारी ऐप लॉन्च किया है, जिसका नाम है ‘Rail One’। ये कोई साधारण ऐप नहीं है, बल्कि रेलवे की हर सुविधा का ‘सुपर-ऐप’ है।

इस ऐप की सबसे बड़ी ताकत है इसका वेटलिस्ट प्रेडिक्शन मॉडल। जब आप टिकट बुक करेंगे, तो एआई पिछले कई सालों के करोड़ों डेटा पॉइंट्स को एनालाइज करेगा और आपको साफ बताएगा कि आपके टिकट के कन्फर्म होने के कितने चांस हैं। अगर ऐप कह रहा है कि 80% से ऊपर चांस है, तो समझ लीजिए कि आपको सीट मिल ही जाएगी। फिलहाल इस मॉडल की एक्यूरेसी (सटीकता) 85% से भी ज्यादा है और इसे 100 से ज्यादा ट्रेनों में ट्रायल के तौर पर शुरू कर दिया गया है।

रेलवे में सफाई को लेकर भी एआई सख्त हो गया है। अब सफाई कर्मचारी को टॉयलेट साफ करने से पहले और बाद की फोटो ऐप पर डालनी होगी। एआई का इंजन उसे रेटिंग देगा। अगर सफाई थ्रेशहोल्ड वैल्यू (एक तय मानक) से कम हुई, तो एआई खुद ही ठेकेदार पर जुर्माना ठोक देगा! और मेरे उन भाइयों के लिए जिन्हें हिंदी या अंग्रेजी नहीं आती, उनके लिए भी खुशखबरी है। अगर कोई ओडिया बोलने वाला भाई है, तो वह अपनी भाषा में ऑडियो रिकॉर्ड करके शिकायत कर सकता है, एआई उसे तुरंत अनुवाद करके अधिकारियों तक पहुंचा देगा।

(Read Also This Post :- INDIA AI समिट में ये क्या हो गया? गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ और वो पूरा सच जो आपको जानना चाहिए

3. स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): अब 30 मिनट में कैंसर का काम तमाम!

मेडिकल के क्षेत्र में विप्रो इंटेलिजेंस (Wipro Intelligence) ने जो कारनामा किया है, वो वाकई दिल जीतने वाला है। अक्सर कैंसर जैसी बीमारी का पता चलने में 3 महीने तक लग जाते हैं, और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन विप्रो का नया ‘हेल्थ एआई’ केवल 30 मिनट में एब्डोमिनल स्कैन के जरिए पेट, लीवर या किडनी की समस्याओं को पकड़ सकता है।

समिट में मैंने देखा कि इस मशीन में 3-स्क्रीन सेटअप लगा है। पहली स्क्रीन पर स्कैन दिखता है, दूसरी पर एआई द्वारा लिखा गया विस्तृत विवरण (Description) और तीसरी स्क्रीन पर सीधा ‘फाइंडिंग्स’ (Findings) यानी बीमारी का नतीजा। इसमें एक रोबोटिक आर्म भी है जो बेहद सटीकता से स्कैन करती है।

सबसे अच्छी बात? ये डॉक्टरों को रिप्लेस नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें असिस्ट कर रहा है। सोचिए, किसी छोटे शहर के क्लिनिक में जहां कोई बड़ा रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, वहां एक साधारण तकनीशियन भी इस एआई की मदद से कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगा पाएगा। इससे बड़ी जीत और क्या होगी?

4. भारतीय सेना और एआई: सरहद पर अब एआई की पहरेदारी

हमारी सेना भी अब हाई-टेक हो गई है। पहले जहां चेक-पोस्ट पर ‘आइसोमेट्रिक सिस्टम’ का इस्तेमाल होता था, उसे अब फेशियल रिकॉग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) से अपग्रेड कर दिया गया है। अब बर्फीली चोटियों पर तैनात जवानों को दस्ताने उतारकर आई-कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं, उनका चेहरा ही उनकी पहचान है।

सेना के स्टाल पर मुझे “सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल” देखने को मिला, जो युद्ध के मैदान में पल-पल की जानकारी देता है। इतना ही नहीं, एआई अब सेना को कांगो जैसे यूएन मिशन (UN Missions) में भी मदद कर रहा है, जहां डेटा के जरिए ऑपरेशन्स को और सटीक बनाया जा रहा है। सेना अब मौसम विभाग के साथ मिलकर एआई के जरिए भूस्खलन, बाढ़ और एवलांच (Avalanche) की सटीक भविष्यवाणी कर रही है। साथ ही, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए संदिग्ध गाड़ियों पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

5. CAR की बुनावट और एआई: 8 महीने का काम अब चुटकियों में!

वाराणसी की गलियों में साड़ी बुनने वाले कारीगरों के लिए भी एआई एक वरदान बनकर आया है। ‘Safter’ नाम के एआई असिस्टेंट ने साड़ी के डिज़ाइन और रंगों के सिलेक्शन के प्रोसेस को पूरी तरह ऑटोमेट कर दिया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले एक साड़ी का पैटर्न बुनने में 8 महीने तक का समय लग जाता था! लेकिन अब एआई के जरिए डिज़ाइन लाइव तैयार होता है। ये सिस्टम बाइनरी वैल्यू (0 और 1) के जरिए बुनाई की मशीन (Electronic Jacquard) को कमांड देता है और धागे खुद-ब-खुद अपनी जगह बना लेते हैं। इससे सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहकों को पहले ही साड़ी का फाइनल लुक (Visual) दिखा दिया जाता है, जिससे बाद में किसी तरह का नुकसान नहीं होता। परंपरा और तकनीक का ऐसा मिलन पहले कभी नहीं देखा!

6. एआई का आध्यात्मिक रूप: डिजिटल अवतार में गीता का ज्ञान

समिट में एक बहुत ही शांत कोना था, जहां एआई के जरिए श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच के संवाद को दिखाया जा रहा था। यह एक विजुअल मीडियम है जहां आप अपनी जिंदगी की समस्याओं के समाधान गीता के माध्यम से पा सकते हैं।

वहां एक चक्र घूमता है और आपसे पूछता है—हिंदी या अंग्रेजी? जैसे ही आप हिंदी चुनते हैं और कोई सवाल पूछते हैं, जैसे “क्रोध पर काबू कैसे पाएं?” या “एक सच्चे योद्धा की क्या पहचान है?”, तो एआई बहुत ही सरल भाषा में गीता के श्लोकों का सार समझाता है। विजुअल होने के कारण यह सीधे दिल को छू जाता है। यह साबित करता है कि एआई केवल मशीन नहीं, हमारी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बन सकता है।

7. क्रिकेट का नया कोच: गूगल जेमिनाई 3.0 (Google Gemini 3.0)

क्रिकेट प्रेमियों, खुश हो जाइए! अब गली क्रिकेट खेलने वाले बच्चे भी इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग ले सकेंगे। Google Gemini 3.0 अब एक एआई कोच के रूप में आ गया है।

मैदान पर लगा कैमरा आपकी बैटिंग के हर मोमेंट को रिकॉर्ड करता है। आपने शॉट मारते वक्त अपना बल्ला कैसे पकड़ा, आपका पोश्चर कैसा था, ये सब एआई एनालाइज करता है। मजे की बात ये है कि यह आपको ‘कार्टून फॉर्मेट’ (Nano Avatar) में आपकी गलतियां दिखाता है और साथ ही रीयल-टाइम कमेंट्री भी करता है। अब कोच की जगह कैमरा और कंप्यूटर की ये जोड़ी आपके खेल को तराशेगी!

8. इंटरनेशनल पवेलियन का सितारा: ‘Syro’ रोबोट

इंटरनेशनल पवेलियन में मेरी मुलाकात हुई ‘Syro’ से। यह एक 3-हाथों वाला सेमी-ह्यूमनॉइड रोबोट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे किसी खास चीज को उठाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है।

अगर आप इसके सामने कोई भी अनजान चीज रख दें, जिसे इसने पहले कभी न देखा हो, तो भी यह उसे स्कैन करके अपनी मर्जी से उठा लेगा। यह वेयरहाउस (जैसे Amazon के गोदाम) और असेंबली लाइन्स के लिए परफेक्ट है। इसे बनाने वाली कंपनी का लक्ष्य यूएस और यूरोपियन मार्केट में इसे लगभग $150,000 में उतारने का है।

9. हमारे स्मार्ट मददगार: पूची (Poochi) और एलेक्सिस (Alexis W)

सुरक्षा और भारी कामों के लिए दो और जांबाज रोबोट्स वहां मौजूद थे:

  • पूची (Poochi): यह एक कुत्ते जैसा दिखने वाला ‘क्वाड्रापेड’ रोबोट है। Unitree ब्रांड के इस रोबोट की कीमत लगभग $30,000 है। इसमें थर्मल और गैस सेंसर्स लगे हैं, जो फैक्ट्री में गैस लीक होने या बिजली की गड़बड़ होने पर तुरंत अलार्म बजा देते हैं। इसकी बैटरी 4 घंटे चलती है और मजे की बात ये है कि बैटरी कम होने पर ये खुद जाकर चार्जिंग पॉइंट पर खड़ा हो जाता है।
  • Alexis W: यह पहियों वाला रोबोट है जिसे वेयरहाउस के भारी सामान उठाने के लिए बनाया गया है। इसे केवल 3 महीने के रिकॉर्ड समय में बनाया गया है। फिलहाल यह कंप्यूटर कमांड पर चलता है, लेकिन जल्द ही यह आपकी आवाज भी सुनने लगेगा।

10. सारांश तालिका: भारत के प्रमुख एआई आविष्कार एक नज़र में

आविष्कार/तकनीकडेवलपर/ब्रांडक्षेत्रमुख्य खासियत
टाटा ऑटोनमोTataपरिवहनएयरपोर्ट-टू-मंडपम ऑटोनॉमस ड्राइविंग, एम्बुलेंस अलर्ट
रेल वन ऐपCRIS/Railwayरेलवे85% सटीक टिकट भविष्यवाणी, सफाई की एआई रेटिंग
हेल्थ एआईWiproचिकित्सा3 screen सेटअप, 30 मिनट में कैंसर डायग्नोसिस
सैप्टर (Safter)हस्तशिल्पसाड़ियों के 8 महीने के डिजाइन का ऑटोमेशन
पूची (Poochi)Unitreeसुरक्षा$30,000 का रोबोट, थर्मल और गैस इंस्पेक्शन
साइरो (Syro)Signlarलॉजिस्टिक्स3-हाथों वाला रोबोट, अनट्रेंड ऑब्जेक्ट पिकिंग
गूगल जेमिनाई 3.0Googleखेल (क्रिकेट)खिलाड़ियों के पोस्चर का कार्टून आधारित विश्लेषण

निष्कर्ष: क्या हम एक नए युग के लिए तैयार हैं?

दोस्तों, भारत मंडपम में दिखा यह नजारा चीख-चीख कर कह रहा है कि भारत अब तकनीक के मामले में दुनिया के पीछे नहीं चल रहा, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। एआई अब सिर्फ लैपटॉप की स्क्रीन में बंद कोई कोड नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है जो उसे सुरक्षित, आसान और बेहतर बना रहा है।

👉 भारत सरकार की आधिकारिक AI पहल के बारे में अधिक जानें:
https://indiaai.gov.in

चाहे वो कैंसर से जंग हो या बॉर्डर पर सुरक्षा, एआई हमारी ताकत बढ़ा रहा है। आपको इनमें से कौन सी तकनीक सबसे ज्यादा ‘गजब’ लगी? क्या आप बिना ड्राइवर वाली कार में सफर करना चाहेंगे? कमेंट में जरूर बताइएगा! भारत की इस डिजिटल तरक्की का गवाह बनिए और खुद को अपडेट रखिये।

जय हिंद! जय भारत!

Q1. AI Impact Summit 2026 कहाँ आयोजित हुआ था?
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ था।

Q2. Rail One ऐप क्या करता है?
यह वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना AI से बताता है और रेलवे सेवाओं को एक ही ऐप में लाता है।

Q3. क्या AI डॉक्टरों की जगह ले लेगा?
नहीं, AI डॉक्टरों की मदद करेगा ताकि बीमारी का जल्दी और सटीक इलाज हो सके।

Q4. टाटा ऑटोनोमो कार की खासियत क्या है?
यह बिना ड्राइवर चल सकती है, टोल खुद भरती है और एम्बुलेंस को रास्ता देती है।

Q5. साड़ी उद्योग में AI कैसे मदद कर रहा है?
AI डिजाइन ऑटोमेट करके महीनों का काम मिनटों में कर देता है और पहले ही फाइनल लुक दिखा देता है।

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