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INDIA AI समिट में ये क्या हो गया? गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ और वो पूरा सच जो आपको जानना चाहिए

इंडिया AI समिट में ये क्या हो गया? गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘चीनी रोबोट’ और वो पूरा सच जो आपको जानना चाहिएनमस्ते दोस्तों! कैसे हैं आप सब? आज की ‘चाय-पे-चर्चा’ थोड़ी ज्यादा ही गरम है क्योंकि मामला सीधा हमारी नेशनल इमेज और ‘डिजिटल इंडिया’ की साख से जुड़ा है। भारत इन दिनों टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में बड़े-बड़े झंडे गाड़ रहा है। हर तरफ चर्चा है कि इंडिया अब ग्लोबल टेक हब बनने वाला है। लेकिन हाल ही में ग्रेटर नोएडा में संपन्न हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) से एक ऐसी खबर निकलकर आई है, जिसे सुनकर आप सच में “माथा पकड़ लेंगे”

यह मामला किसी बड़ी उपलब्धि का नहीं, बल्कि एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर का है जिसने सोशल मीडिया से लेकर देश की संसद तक में खलबली मचा दी है। सोचिए, एक बड़ा ग्लोबल इवेंट, विदेशी डेलिगेट्स, सरकारी मंत्री, और वहां एक नामी यूनिवर्सिटी ने कुछ ऐसा कर दिया कि अब हर कोई पूछ रहा है— “भाई साहब, ये क्या हो गया?” गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक चीनी रोबोट को अपना ‘स्वदेशी आविष्कार’ बताकर पेश किया और जब पोल खुली, तो पूरी दुनिया के सामने भारत की भारी किरकिरी हो गई। चलिए, इस पूरे विवाद की तह तक जाते हैं और समझते हैं कि ये ‘जुगाड़’ भारी कैसे पड़ गया।

क्या है पूरा मामला? (The Core Incident)

मामला ग्रेटर नोएडा के उस बड़े मंच का है जहां ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन किया जा रहा था। यह कोई छोटा-मोटा फंक्शन नहीं था, बल्कि एक ग्लोबल लेवल का इवेंट था, जहां दुनियाभर की नजरें भारत के उभरते हुए AI टैलेंट पर टिकी थीं। इस बड़े मंच पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) ने अपना एक स्टॉल लगाया और वहां एक चार पैरों वाला रोबोट पेश किया, जिसका नाम उन्होंने बड़े गर्व से ‘ओरायन’ (Orion) रखा था।

यूनिवर्सिटी के नुमाइंदों और प्रोफेसर्स ने वहां आने वाले हर शख्स को यही बताया कि इस रोबोट को उनके अपने ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के टैलेंटेड स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स ने तैयार किया है। इसे यूनिवर्सिटी की एक बहुत बड़ी तकनीकी क्रांति के रूप में पेश किया गया। इवेंट का माहौल इतना जबरदस्त था कि खुद केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी वहां पहुंचे। उन्होंने इस रोबोट के साथ एक फोटो और वीडियो शेयर करते हुए भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत की तारीफ की। लेकिन कहते हैं ना कि इंटरनेट की नजरों से कुछ नहीं छिपता। जैसे ही ये तस्वीरें और दावे सोशल मीडिया पर वायरल हुए, वैसे ही इस ‘स्वदेशी’ आविष्कार का असली चेहरा सामने आने लगा।

दावा बनाम हकीकत: कैसे खुला राज? (Fact Check: Claim vs. Reality)

जैसे ही टेक-गुरुओं और इंटरनेट जासूसों की नजर इस ‘ओरायन’ रोबोट पर पड़ी, वैसे ही इसका फैक्ट-चेक बिजली की रफ्तार से शुरू हो गया। और जो सच सामने आया, उसने यूनिवर्सिटी के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

जांच में पता चला कि यह कोई भारत के लैब में बना ‘स्वदेशी’ रोबोट नहीं है, बल्कि चीन की एक मशहूर कंपनी “Unitree Robotics” का बना-बनाया प्रोडक्ट है। इस मॉडल का असली नाम ‘Unitree Go2’ है, जो इंटरनेशनल मार्केट में किसी के लिए भी उपलब्ध है। कमाल की बात तो यह है कि यह रोबोट ऑनलाइन मात्र $2800 (लगभग 2.3 लाख रुपये) में खरीदा जा सकता है। यूनिवर्सिटी ने बस उसे चीन से मंगाया और एक ग्लोबल समिट में इसे अपना खुद का ‘इन्वेंशन’ बताकर पेश कर दिया। यह सिर्फ एक रोबोट का मामला नहीं था, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ के नाम पर एक विदेशी प्रोडक्ट को पेश करने की वो कोशिश थी, जिसने पूरे देश की तकनीकी साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया।

राहुल गांधी, कांग्रेस और हुड्डा का तीखा हमला (Political Reaction)

जब मामला इतना बड़ा हो और उसमें ‘चाइनीज कनेक्शन’ निकल आए, तो राजनीति कैसे पीछे रह सकती थी? इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और यूनिवर्सिटी को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर इसे “PR Spectacle” (पीआर का तमाशा) करार दिया।

राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का सही इस्तेमाल करने के बजाय, यह समिट एक अव्यवस्थित पीआर इवेंट बनकर रह गया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि सरकार भारतीयों का डेटा दांव पर लगा रही है और “चाइनीज प्रोडक्ट्स” को अपना बताकर जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस पार्टी ने इसे देश के लिए “बेहद शर्मनाक” बताया।

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सिर्फ राहुल ही नहीं, बल्कि हरियाणा के कद्दावर नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जो झूठ बोला है और जिस तरह से देश की बदनामी कराई है, इसके लिए उन्हें माफी नहीं मिलनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद इस “फेक इंफॉर्मेशन” को शेयर किया, जिससे पूरी दुनिया में गलत मैसेज गया कि भारत अपनी प्रगति के लिए विदेशी उत्पादों पर निर्भर है और उन्हें अपना बताकर पेश कर रहा है।

दावों की तुलना: क्या कहा था और क्या निकला? (Comparison Table)

इस पूरे स्कैम को समझने के लिए जरा इस टेबल पर नजर डालिए, जो गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘यू-टर्न’ की पूरी कहानी बयां करती है:

विषय (Topic)यूनिवर्सिटी का दावा (University’s Claim)कड़वा सच (The Reality)
निर्माण (Origin)हमारे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने इसे मैन्युफैक्चर किया है।चीन की Unitree Robotics से सीधा खरीदा गया।
नाम (Model)स्वदेशी रोबोट ‘ओरायन’ (Orion)Unitree Go2 (एक कमर्शियल चाइनीज मॉडल)।
निवेश (Investment)हमने AI में ₹350 करोड़ का भारी इन्वेस्टमेंट किया है।यह रोबोट ऑनलाइन मात्र $2800 में उपलब्ध है।
मकसद (Purpose)खुद का आविष्कार और भविष्य की तकनीक।पकड़े जाने पर कहा— “केवल बच्चों के मोटिवेशन के लिए लाए थे।”
आयोजकों का एक्शनहमें गर्व है कि हम समिट का हिस्सा हैं।झूठ पकड़े जाने पर कैंप खाली करने का आदेश दिया गया।

प्रोफेसर साहब का ‘यू-टर्न’ और यूनिवर्सिटी की सफाई (The Defense)

जब चारों तरफ से फजीहत होने लगी और ट्विटर (X) पर लोग सवाल पूछने लगे, तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी सफाई पेश की। लेकिन यह सफाई पहले किए गए दावों से इतनी अलग थी कि इसे ‘यू-टर्न’ कहना भी कम होगा। यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने अपनी सफाई में कहा, “हमने कभी क्लेम नहीं किया कि हमने इसे मैन्युफैक्चर किया है। हमने इसके लोगो (Logo) को भी नहीं छिपाया। हमने बस इसे अपने ₹350 करोड़ के एआई इन्वेस्टमेंट के हिस्से के रूप में दिखाया है। हमारे पास ‘सेंटर फॉर ड्रोन इंटेलिजेंस सिमुलेशन’ है और एक हाई-टेक ‘Nvidia Lab’ है। हम चाहते थे कि बच्चे इस रोबोट से इंटरेक्ट करें और उन्हें रिसर्च के लिए प्रेरणा मिले।”

लेकिन रुकिए! यही तो असली पेंच है। सोर्स बताते हैं कि DD News को दिए गए शुरुआती इंटरव्यू में यूनिवर्सिटी के नुमाइंदों ने साफ-साफ इसे अपना खुद का प्रोडक्ट बताया था। जैसे ही फैक्ट-चेक हुआ और अश्विनी वैष्णव के ट्वीट पर लोगों ने कमेंट करना शुरू किया, यूनिवर्सिटी की कहानी बदल गई। यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि पकड़े जाने के बाद अपनी इज्जत बचाने के लिए ‘रिसर्च और मोटिवेशन’ का सहारा लिया गया।

बीच की जरूरी बात (Mandatory Internal Link)

https://news24online.com/videos/india-ai-impact-summit-galgotias-steals-chinese-robot-l-rahul-l-explained-5-min-l-rimjhim-jethani/334547/

किरकिरी और कारवाई: एक्सपो से छुट्टी (Consequences)

झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती, और इस समिट में भी यही हुआ। जब आयोजकों को इस विवाद की गहराई का अंदाजा हुआ, तो उन्होंने बहुत सख्त कदम उठाया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत आदेश दिया गया कि वे अपना एक्सपो एरिया और कैंप खाली करें। यह किसी भी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के लिए सबसे बड़ी अपमानजनक बात है कि उन्हें एक नेशनल समिट से बाहर कर दिया जाए।

न्यूज़ 24 की रिपोर्टर रिमझिम जेठानी, जो खुद वहां मौजूद थीं, उन्होंने बताया कि यह वाकई दुखद था। उस समिट में देश के कोने-कोने से छोटे बच्चे, युवा इनोवेटर्स अपनी दिन-रात की मेहनत से बनाए गए असली मॉडल्स लेकर आए थे। किसी ने कचरे से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट बनाया था, तो कोई खेती के लिए स्मार्ट एआई लेकर आया था। लेकिन गलगोटिया यूनिवर्सिटी की इस एक हरकत ने उन सभी बच्चों की मेहनत पर पानी फेर दिया। एक ऐसी घटना ने पूरे नेशनल इवेंट की मिट्टी में मिला दिया, जिससे ग्लोबल ऑडियंस के सामने भारत की इमेज एक “कॉपी-पेस्ट” नेशन की बन गई।

भारतीय टैलेंट और दिखावे की राजनीति (Critical Analysis)

भाई साहब, अब जरा मुद्दे की बात करते हैं। यह पूरा मामला सिर्फ एक $2800 के रोबोट का नहीं है, बल्कि उस खतरनाक मानसिकता का है जो आज हमारे एजुकेशन सिस्टम और ‘टेक-शोबाजी’ में घर कर गई है। हम “स्वदेशी” और “आत्मनिर्भर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो बहुत करते हैं, लेकिन क्या हम वाकई इसके लिए जमीनी स्तर पर मेहनत कर रहे हैं?

भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। हमारे छात्र आज सिलिकॉन वैली से लेकर स्पेस एजेंसीज तक में लीडर हैं। लेकिन जब बड़े संस्थान “शॉर्टकट” अपनाते हैं और चीनी माल पर अपना ठप्पा लगाकर उसे भारत की उपलब्धि बताते हैं, तो वे उन हजारों ईमानदार रिसर्चर्स का अपमान करते हैं जो अपनी लैब्स में पसीना बहा रहे हैं। यह “जुगाड़” संस्कृति और “फेक पीआर” का नशा हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत गलत उदाहरण पेश कर रहा है।

जब एक ग्लोबल ऑडियंस ऐसी खबरें देखती है, तो वे असली इंडियन स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स पर भी शक करने लगते हैं। यह ‘Brand India’ के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। हमें समझना होगा कि डिजिटल इंडिया का सपना चीनी रोबोट्स को खरीदकर और उन पर अपना नाम लिखकर पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए असली कोडिंग, असली मैन्युफैक्चरिंग और असली ईमानदारी की जरूरत है।

निष्कर्ष: हमने क्या सीखा? (Conclusion)

‘इंडिया एआई समिट’ का यह विवाद हमें एक बहुत बड़ा सबक दे गया है। तकनीक के इस डिजिटल दौर में आप किसी को ज्यादा देर तक बेवकूफ नहीं बना सकते। गलगोटिया यूनिवर्सिटी की इस किरकिरी ने यह साबित कर दिया है कि बिना असली मेहनत के आप ग्लोबल लीडर नहीं बन सकते। हमें असली इनोवेशन को बढ़ावा देना चाहिए और ऐसे संस्थानों पर नकेल कसनी चाहिए जो दिखावे के लिए देश की साख दांव पर लगा देते हैं।

अब आप ही बताइए— क्या आपको लगता है कि किसी यूनिवर्सिटी को इस तरह के झूठ के लिए ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए? या फिर क्या यह सिर्फ एक छोटी सी गलती थी जिसे इग्नोर किया जा सकता है? अपनी राय हमें नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं, क्योंकि ये बात सिर्फ एक रोबोट की नहीं, हमारे देश की शान की है!

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❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद क्या है?
इस विवाद में यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उन्होंने एक चीनी कंपनी का रोबोट अपना स्वदेशी आविष्कार बताकर AI समिट में पेश किया।

Q2. असली रोबोट कौन सा था?
जांच में पता चला कि यह Unitree कंपनी का Go2 नाम का कमर्शियल रोबोट था।

Q3. यह मामला इतना बड़ा क्यों बना?
क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट था और इससे भारत की टेक्नोलॉजी इमेज पर असर पड़ा।

Q4. क्या यूनिवर्सिटी ने गलती मानी?
यूनिवर्सिटी ने कहा कि रोबोट सिर्फ छात्रों को प्रेरित करने के लिए लाया गया था, लेकिन पहले दिए गए बयान अलग थे।

Q5. इससे भारत की छवि पर क्या असर पड़ा?
इस घटना से “मेड इन इंडिया” दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

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